कहते है , सुनते है ये सभी से, या फिल्मों में, या टीवी पर या आस-पास के लोगों से : कि आज के ज़माने में
इंसानियत नहीं बची है या लोगों का ज़मीर मर गया है |
हालाँकि जो ये बात कहते है उनमे कितनी इंसानियत या ज़मीर बचा है इसका कोई पता नहीं | हां पर ये बात जरुर सच लगती है ! क्यूंकि आये दिन हमें सुनने को मिलता है की सड़क पर एक्सीडेंट हुआ , ज़ख़्मी बंदा सड़क पर ही तड़पता रहा लोग उधर से गुज़रते रहे पर कोई हेल्प को आगे नहीं आया |
लड़की को सड़क पर खुलेआम आवारा किस्म के लड़के छेड़ रहे है और लोग तमाशबीन बने खड़े है | मदद को आगे नहीं आने के सैकड़ों बहाने मिल जाते है इन कायर और कमज़ोर लोगों को | पर चुकी इनका ज़मीर जिंदा नहीं इसीलिए किसी को आगे बढ़कर , हिम्मत करके मदद करने का एक कारण नहीं ढूंढ पाता इनका दिल |
पर कहते है न की सभी लोग एक से नहीं होते | इसी का उदाहरण है इस वीडियो में दिख रहा एक होटल का खाना पहुचाने वाला डिलीवरी बॉय | देखें वीडियो | click here for video

