ये ताज़ा मामला हरियाणा के पलवल जिला के हथिन में स्थित मलाई गाँव की है |
जहाँ एक पति ने अपनी मायके गयी पत्नी को अपने ससुर के मोबाइल पर तीन बार तलाक शब्द लिखकर भेज दिया | ये पूरा घटना क्रम हुआ कुछ यूँ की पति-पत्नी में किसी बात को लेकर मामूली कहा-सुनी हुई | इस पर पति ने ने युवती को तलाक की धमकी देने लगा | झगडे के बाद पत्नी अपने मायके चली गयी | इसके बाद पति ने ये तलाक का सन्देश अपने ससुर के मोबाइल पर भेज देता है | इस दंपत्ति के विवाह को अभी मात्र दो साल हुए है और दंपत्ति की एक छोटी बेटी भी है | पति अब दावा कर रहा है की उसने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया | उसके दावे से तलाक की इस विधि पर फिर से बहस छिड़ गयी है |
इस मुद्दे को सुलझाने के लिए गाँव जलालपुर में मुस्लिम मेव महापंचायत बुलाई गयी है | अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है की मोबाइल पर मेसेज के माध्यम से तीन तलाक के लिखे जाने को तलाक माना जायेगा या नहीं | पंचायत में तलाक देने का दावा करने वाले शाकिर से पूछा गया कि क्या मोबाइल फ़ोन पर तलाक का मेसेज उसी ने भेजा था ? इस पर शाकिर ने बताया कि उसने पुरे होश-हवास के साथ ये तलाक का मैसेज भेजा था |
शाकिर के मंजूरी के बाद पंचों ने फैसला किया कि इस पर इस्लाम के विद्वानों और मुफ्तियों से सलाह मशविरा किया जायेगा | पंचों का एक समूह मांडीखेडा गया और वहां इस्लामी मदरसा के मुफ़्ती से राय ली जिस पर मुफ़्ती ने तत्काल कोई निर्णय नहीं दिया | अब बुधवार को जलालपुर गाँव में मुस्लिम मेव महापंचायत होगी , जिसमे इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लिया जायेगा | पंचायत लखनाका के पूर्व सरपंच जाकिर हुसैन ने कहा की बुधवार को होने वाली महापंचायत में इस्लामी शरियत और देश के कानून को देखते हुए फैसला लिया जायेगा |
इस मुद्दे पर इस्लामी विद्वान डॉक्टर मोहम्मद अरशद ने बताया की तीन तलाक गैर-इस्लामिक है | इस्लाम में तीन तलाक एक साथ देने का कोई सिस्टम नहीं है | उनका कहना है की 20 से ज्यादा देशों तीन तलाक को बैन कर रखा है |
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इस पुरे मामले को एक महिला की नज़र या एक न्याय प्रिय नज़रिये से देखा जाये तो ये बताया जाये की इस तरह के तलाक से उस युवती और उसकी छोटी बेटी के भविष्य का क्या होगा ? उनके भविष्य पर तो प्रश्न चिन्ह लग गया है की उनका क्या होगा ? ये कठमुल्ले लोग किस तरह के समाज का निर्माण करना चाहते हैं जहाँ महिलाओं का पल-पल पुरुषों के द्वारा शोषण में बीते | आखिर इतने छोटे से झगडे का अंत इतना भयावह कैसे हो सकता है ? क्या तीन तलाक पर प्रतिबन्ध पूरी तरह से लगाना वाजिब नहीं होगा ? समय आ गया है की इसके खिलाफ मुस्लिम समाज के ही पढ़े लिखे लोग अपनी आधी आबादी को न्याय दिलाने के लिए आगे आये | अगर आप भी इस मत से इतेफाक रखते है की तीन तलाक पूरी तरह से प्रतिबंधित हो तो इस लेख को शेयर करें |

