}); EMBAR INDIA: जापान में नहीं होता है जिहाद, आतंकवाद या फ़तवा, वहां इस्लाम पर लगी बंदिशें जानकर कठमुल्लों का खून खौल जायेगा |

Wednesday, May 31, 2017

जापान में नहीं होता है जिहाद, आतंकवाद या फ़तवा, वहां इस्लाम पर लगी बंदिशें जानकर कठमुल्लों का खून खौल जायेगा |

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आज के समय में दुनिया का लगभग हर देश इस्लामिक आतंकवाद से कमोबेश परेशान हैं | लेकिन अगर आप


एक एशियाई देश जापान पर ही नज़र डालेंगे तो आपको पता चलेगा की यहाँ आतंकवाद या जिहाद जैसा कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है | इसके पीछे के सैकड़ों कारण हो सकते हैं | कुछ मुख्या कारण हम यहाँ आपको बता दे रहें हैं | अगर इस तरह की बंदिशें भारत या किसी भी अन्य देश में दशकों तक लगा दी जाये तो शायद वहां से भी आतंकवाद और जिहाद का नामों निशान मिट जायेगा |


जापान में किसी भी देश से आये मुसलमान को स्थायी तौर रहने के लिए लगभग मनाही है | वहां पर रहने वाले मुसलमान दशकों पहले से रहते आ रहें है | वहां पर बसने वाले सभी मुस्लिम बाहर से आये हैं , मतलब वहां धर्म परिवर्तन जैसी कोई बात आज तक नहीं हुई है | ज्यादातर मुस्लिम तुर्की से आये हैं ,  क्यूंकि तुर्की एक तरक्कीपसंद मुस्लिम राष्ट्र  है और वहां के मुल्ला-मौलाना आतंकवाद जैसे शब्द अपने जुबान तक पर नहीं लाते | जापान दुनिया का एक मात्र देश है जहाँ मुस्लिमों की आबादी बढ़ने की बजाय घटी है | एक अनुमान के मुताबिक जापान में कुछ साल पहले जहाँ दस लाख मुसलमान रहते थे वहीँ अब मात्र दो लाख मुसलमान बचे हैं | जापान में कोई इस्लामी मदरसा नहीं खोल सकता है | 



यहाँ मौजूद सभी मस्जिदों में अरबी की जगह जापानी भाषा में नमाज पढ़ी और पढाई जाती है | वहां के सभी मुस्लिम अपनी सभी धार्मिक व्यवहार जापानी भाषा में ही करते हैं | जापान के विश्वविद्यालय में अरबी, फारसी या किसी मुस्लिम राष्ट्र की कोई भाषा नहीं पढाई जाती | मुस्लिम लेखकों द्वारा लिखे साहित्य को भी वहां स्थान नहीं दिया जाता | जापान में केवल पांच मुस्लिम राष्ट्रों को दूतावास खोलने के आदेश दिए गए हैं | वहां काम करने वाले करमचारियों के लिए जापानी भाषा में ही व्यवहार करना अनिवार्य है, ये मुस्लिमों पर भी लागू होता है | दरअसल जब से जापान ने बौद्ध धर्म को अपनाया है तब से ही किसी अन्य इस्लाम या इसाई धर्म में वहां की रूचि नहीं रह गयी है | 






जिन दिनों बहुत सख्ती नहीं थी  तब भी इस्लाम या इसाई मिसिनिरियों का बहुत आवागमन नहीं था | जापान की सरकार और जनता केवल अपने राष्ट्रीय हित के लिए ही सोचती रहती है | जापान में नाहीं कोई जिहाद शब्द को उच्चारण करता है और नाहीं वहां दारुल हर्ब या दारुल-इस्लाम जैसी कोई सोच है | वहां फतवे देने और मानने की सख्त मनाही है यही कारण है की आज तक नहीं सुना गया की जापान में कोई आतंकवादी हमला हुआ हो या इस्लाम के नाम पर कोई बम धमाका हुआ हो |