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आपको अन्ना हजारे तो याद होंगें ही | उम्मीद है उनका जनलोकपाल के लिए किया गया पूरा आन्दोलन के दिन
भी याद होंगें | अब इसी बात से जुड़ा एक चुटकुला वहाट्स एप्प और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहें हैं | अगर आपको अरविन्द केजरीवाल और अन्ना की जोड़ी द्वारा किया गया आन्दोलन का लम्हां याद है तो गारंटी है ये चुटकुला आपको जबरदस्त हंसाएगा | पढ़िए वो चुटकुला कुछ इस प्रकार है |
आपको अन्ना हजारे तो याद होंगें ही | उम्मीद है उनका जनलोकपाल के लिए किया गया पूरा आन्दोलन के दिन
भी याद होंगें | अब इसी बात से जुड़ा एक चुटकुला वहाट्स एप्प और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहें हैं | अगर आपको अरविन्द केजरीवाल और अन्ना की जोड़ी द्वारा किया गया आन्दोलन का लम्हां याद है तो गारंटी है ये चुटकुला आपको जबरदस्त हंसाएगा | पढ़िए वो चुटकुला कुछ इस प्रकार है |
" सन २०११ के लोकपाल आन्दोलन में अन्ना को दूसरा गाँधी कह रहे थे
हमें तभी समझ जाना चाहिए था की केजरीवाल दूसरा नेहरु निकलेगा | "
हालाँकि ये चुटकुला केजरीवाल पर बना है लेकिन इसमें ज्यादा तंज़ जवाहर लाल नेहरु और उनके प्रशंषकों के सोच के ऊपर प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है | वैसे तो आज भी नेहरु से जुड़े तमाम तरह के किस्से स्कूल में पढाये जाते हैं |
लेकिन इसमें सिर्फ नेहरु के चरित्र का आधा हिस्सा ही दिखाते है |
वो ऐय्याश और बेधड़क होक अपनी मस्ती में ही डूबे रहने वाला चरित्र देश के आने वाली पीढ़ी से छुपाया जाता है | ये नहीं बताया जाता की कैसे उन्होंने कश्मीर का मसला सरदार सिंह पटेल को नहीं सुलझाने दिया ? कैसे उनकें कारण ही चीन संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थायी सदस्य बन गया और वीटो पॉवर पा गया ? कैसे भारत को चीन से 1962 में नेहरु की गलत नीतियों के कारण हमला और हार नसीब हुआ ? ये सभी केवल और केवल नेहरु के कारण हुए क्योंकि उनमें वो क्षमता नहीं थी जो एक देश के शाषक में होना चाहिये, लेकिन फिर भी वो प्रधानमंत्री की कुर्सी से अपने मरने तक चिपके रहे | और देश की तरक्की के नसीब में दे गए एक घटिया तरह की तुष्टिकरण की राजनीति |
वो ऐय्याश और बेधड़क होक अपनी मस्ती में ही डूबे रहने वाला चरित्र देश के आने वाली पीढ़ी से छुपाया जाता है | ये नहीं बताया जाता की कैसे उन्होंने कश्मीर का मसला सरदार सिंह पटेल को नहीं सुलझाने दिया ? कैसे उनकें कारण ही चीन संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थायी सदस्य बन गया और वीटो पॉवर पा गया ? कैसे भारत को चीन से 1962 में नेहरु की गलत नीतियों के कारण हमला और हार नसीब हुआ ? ये सभी केवल और केवल नेहरु के कारण हुए क्योंकि उनमें वो क्षमता नहीं थी जो एक देश के शाषक में होना चाहिये, लेकिन फिर भी वो प्रधानमंत्री की कुर्सी से अपने मरने तक चिपके रहे | और देश की तरक्की के नसीब में दे गए एक घटिया तरह की तुष्टिकरण की राजनीति |
