उत्तर प्रदेश की पिछली सपा सरकार ने हर तरह से अपने वोट बैंक को तुष्ट करने के लिए तरह-तरह की योजनायें
लेकर आई थी | अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव इन दोनों का ये मत रहा है की मुसलमान को किसी भी तरह अपने पाले में रखना होगा, तभी हमारी सरकार बची रह सकती है | इस कारण मुसलमानों के जायज-नाजायज दोनों तरह की मांगों को पूरा करने के ये पक्षधर थे | इसी के तहत अखिलेश सरकार ने लगभग 85 तरह के योजनाओं में मुसलमानों के लिए विशेष 20% का कोटा तय कर दिया था | जनता को धोखा देने के लिए नाम इसे अल्पसंख्यकों का कोटा दिया |
इस कोटे में नियमानुसार जिन क्षेत्रों में मुसलमानों की आबादी 25% हो, वहां योजनाओं को लागू करने में सख्ती बरती जाये |पहला शासनादेश मुख्या सचिव जावेद उस्मानी की तरफ से जारी किया जाता था | इसके बाद इसे समय समय पर सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किये जाते थे | सभी जिला अधिकारीयों के अधीन एक कमिटी बनायीं गयी थी, जो इसकी निगरानी करती थी | अखिलेश सरकार ने जितनी मुस्तैदी मुसलमानों को तुष्ट करने में दिखाई अगर आधा भी उत्तर प्रदेश के कामों में दिखाते तो शायद आज वो उत्तर प्रदेश की सत्ता में बने रहते |
अब इस कोटे का आधार बनाया जो बनाया गया था वो जानिये | नेशनल सैंपल सर्वे का एक रिपोर्ट के अनुसार मुसलमानों औसत प्रति व्यक्ति खर्च रोजाना सिर्फ ३२.६६ रूपये है | ग्रामीण क्षेत्रों में मुसलमान परिवारों का औसत खर्च 833 रूपये, हिन्दुओं का 888 रूपये , ईसाईयों का 1296 रूपये, और सिखों का 1498 रूपये बताया गया था | अब इस रिपोर्ट के अनुसार हिन्दुओं और मुसलमानों का जो औसत पारिवारिक खर्च है उसमें बहुत ज्यादा फर्क नहीं है तो अगर कोटा मिलना था तो दोनों को मिलना चाहिए था | पर नहीं दिया गया सिर्फ मुसलमानों को | इस रिपोर्ट के अनुसार शहरी मुसलमानों की स्थिति अन्य धार्मिक समूहों के मुकाबले ज्यादा दयनीय बताई गयी थी | जनता की राय यही रही है इसके बारे में की अगर कोटा जैसी कोई चीज हो तो वो आर्थिक आधार पर हो ना कि धार्मिक आधार पर |
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इस मुसलमानों के लिए कोटे को योगी सरकार ने ख़त्म करने का फैसला ले लिया है | मौजूदा समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने इस कोटे को ख़त्म करने की सहमती दे दी है | इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने लाया जायेगा, जहाँ इस कह्तं करने की स्वीकृति मिलने के पुरे आसार है | इसके पहले अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी भी इस कोटे को ख़त्म करने की सहमती दे चुके हैं |
